Monday, July 24, 2006

सम्पूर्ण रामायण

साथियों मुझे बताते हुए बहुत हर्ष हो रहा है कि श्री रामचरित मानस को सम्पूर्ण रूपेण यूनिकोड मे इन्टरनैट पर उपलब्ध करा दिया गया है। इस संकलन मे मुझे भाई रवि रतलामी और अनूप शुक्ला का बहुत बहुत सहयोग प्राप्त हुआ। इनके भागीरथी प्रयासों की ही वजह से आज यह संकलन पूर्ण रूप मे आपके सामने प्रस्तुत हो सका है।

साथ ही मै बताना चाहूंगा कि श्रीरामचरित मानस का संकलन अपने पुराने स्थान से उठकर अपने नये पते पर पहुँच गया है। आप सभी साथियों से निवेदन है कि अपने सुझाव एवं आलोचनाए नए पते पर दें।

धन्यवाद
जीतेन्द्र चौधरी

22 comments:

Umesh said...

yah bahut hi sarahniya prayas hai

SATYAJEET said...

jitendraji,
thanks for your endeavour. some days before we cannot think about unicode on net, but these days with people like you is doing a lot.
thanks again

Brahma Kumar said...

जीतेंद्र जी , आपका प्रयास अत्यन्त सराहनीय है, साधुवाद. आज जहाँ चारो ओर अधर्म और अनीति का अंधकार है वहाँ कोई मनुष्य दैवीय प्रेरणा से ही ऐसे महती प्रयास कर सकता है. आपके साथ साथ आपको ऐसी सत्प्रेरना देने वाले साधु ह्रदय एवं आपके समस्त सहयोगियों को पुनश्च साधुवाद.

Dinesh said...

Jitender Ji,
Apne Tulsidas Jee se Bhi Mahan kary Kia hai Hamare vichar se Ap ko Koti Bar Parnam. Apne aisa mahan kary Kar Sarvat is grandh ko Uplabdh Kra rahein hain Jisse Hamare Videshi Bahi Bhi Ramcharitmanas ka Aolokanka Bhagwan Ka gurgan Kare. Ab Ko Hamare Taraf se Krodo Bar Parnam
From dinesh Kumar

I and god said...

jitendra jee,

lot of love to you. just i want to bring in your kind notice the work done by iit kanpur, that to give a search function in whole ramcharitmans. the link is ;

http://www.ramcharitmanas.iitk.ac.in/manas1/html/mainsearch.html


what do you say about it.

dasanudas ashok

manav01s said...

jitendra g aapko is mahan pavitra granth ko net per uplabdh karane ke liye karodo lakho bar dhanyabad.aasa he aap is granth ke hindi anuvad ko bhi iske sath uplabdh karane ka prayas karenge. prabhu shri ram ki aap per krapa aur ashirvad bana rahe. jhansi ( u.p.)ke pas orcha nager me bhagwan shriram ki swayamprakat moorti he. sakchat prabhu shri ram vahan viraje hein. aap vahan avashya jaeye. prabhu ki karapa bani rahe. sadar jai shri ram. sanjay sharma bhopal se...

दर्द-ए-दर्द said...

महोदय,
आपका प्रयास सराहनीय है. हमारे इस ग्रन्थ का इंटरनेट पर होना अति आवश्यक है. जो आपने कर दिया. बधाई के पत्र हैं आप. शुभकामनायें...

SKB said...

Great effort and corresponding success but please introduce a search ioption which can use english entries to search and locate psitions in Hindi. Thanks.

Sushil Kumar Bhatnagar

ई-गुरु राजीव said...

जय श्री राम,
आपका कार्य अत्यंत सराहनीय है, मैं भगवान् श्री राम का बड़ा ही भक्त हूँ. अतः आपका कार्य मुझे बहुत ही...........

बस दिल को छू गया.

बहुत बहुत बधाई.

वृक्षारोपण : एक कदम प्रकृति की ओर said...

डॉ. दिव्या श्रीवास्तव ने विवाह की वर्षगाँठ के अवसर पर किया पौधारोपण
डॉ. दिव्या श्रीवास्तव जी ने विवाह की वर्षगाँठ के अवसर पर तुलसी एवं गुलाब का रोपण किया है। उनका यह महत्त्वपूर्ण योगदान उनके प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता, जागरूकता एवं समर्पण को दर्शाता है। वे एक सक्रिय ब्लॉग लेखिका, एक डॉक्टर, के साथ- साथ प्रकृति-संरक्षण के पुनीत कार्य के प्रति भी समर्पित हैं।
“वृक्षारोपण : एक कदम प्रकृति की ओर” एवं पूरे ब्लॉग परिवार की ओर से दिव्या जी एवं समीर जीको स्वाभिमान, सुख, शान्ति, स्वास्थ्य एवं समृद्धि के पञ्चामृत से पूरित मधुर एवं प्रेममय वैवाहिक जीवन के लिये हार्दिक शुभकामनायें।

आप भी इस पावन कार्य में अपना सहयोग दें।
http://vriksharopan.blogspot.com/2011/02/blog-post.html

लक्ष्मीकांत सोनी said...

बहुत ही उम्दा व सराहनीय कार्य...
बधाइयाँ व शुभकामनाएँ...

Technomerate... said...

Jai Sri Ram... Jai Hanuman

priyanka barsaiya said...

SIR APKA yogdaan sayarneey hai .mae ye jan na chahti hu ki mantra siddhi raat k waqt hi jaruri hai ise hum dein me na ekr skte h

priyanka barsaiya said...

SIR APKA yogdaan sayarneey hai .mae ye jan na chahti hu ki mantra siddhi raat k waqt hi jaruri hai ise hum dein me na ekr skte h

OMANAND0HAM said...

Your work is really excellent because this is not available even from the Gita Press. I would like to suggest that it will be more useful if you provide a facility to search a choupai, Doha or a kaand.

My hearty congratulations to you for such a great work.

SHASHI CHAURASIYA said...

थैंक यू सुक्रिया

Balram Jasuja said...

बहुत ही उम्दा व सराहनीय कार्य...
बधाइयाँ

L.C.PRAJAPATI said...

अवधपुरी सम प्रिय नहिं सोऊ। यह प्रसंग जानइ कोउ कोऊ।।
जन्मभूमि मम पुरी सुहावनि। उत्तर दिसि बह सरजू पावनि।।
जा मज्जन ते बिनहिं प्रयासा। मम समीप नर पावहिं बासा।।
अति प्रिय मोहि इहाँ के बासी। मम धामदा पुरी सुख रासी।।
हरषे सब कपि सुनि प्रभु बानी। धन्य अवध जो राम बखानी।।

L.C.PRAJAPATI said...

अवधपुरी सम प्रिय नहिं सोऊ। यह प्रसंग जानइ कोउ कोऊ।।
जन्मभूमि मम पुरी सुहावनि। उत्तर दिसि बह सरजू पावनि।।
जा मज्जन ते बिनहिं प्रयासा। मम समीप नर पावहिं बासा।।
अति प्रिय मोहि इहाँ के बासी। मम धामदा पुरी सुख रासी।।
हरषे सब कपि सुनि प्रभु बानी। धन्य अवध जो राम बखानी।।

L.C.PRAJAPATI said...

कंचन कलस बिचित्र सँवारे। सबहिं धरे सजि निज निज द्वारे।।
बंदनवार पताका केतू। सबन्हि बनाए मंगल हेतू।।
बीथीं सकल सुगंध सिंचाई। गजमनि रचि बहु चौक पुराई।।
नाना भाँति सुमंगल साजे। हरषि नगर निसान बहु बाजे।।
जहँ तहँ नारि निछावर करहीं। देहिं असीस हरष उर भरहीं।।
कंचन थार आरती नाना। जुबती सजें करहिं सुभ गाना।।
करहिं आरती आरतिहर कें। रघुकुल कमल बिपिन दिनकर कें।।

L.C.PRAJAPATI said...

जप तप नियम जोग निज धर्मा। श्रुति संभव नाना सुभ कर्मा।।
ग्यान दया दम तीरथ मज्जन। जहँ लगि धर्म कहत श्रुति सज्जन।।
आगम निगम पुरान अनेका। पढ़े सुने कर फल प्रभु एका।।
तब पद पंकज प्रीति निरंतर। सब साधन कर यह फल सुंदर।।

L.C.PRAJAPATI said...

नाना भाँति मनहि समुझावा। प्रगट न ग्यान हृदयँ भ्रम छावा।।
खेद खिन्न मन तर्क बढ़ाई। भयउ मोहबस तुम्हरिहिं नाई।।
ब्याकुल गयउ देवरिषि पाहीं। कहेसि जो संसय निज मन माहीं।।
सुनि नारदहि लागि अति दाया। सुनु खग प्रबल राम कै माया।।
जो ग्यानिन्ह कर चित अपहरई। बरिआई बिमोह मन करई।।
जेहिं बहु बार नचावा मोही। सोइ ब्यापी बिहंगपति तोही।।